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Monday, October 18, 2021

धन योगायोग तथा वृष लग्न द्वितीया भाग

 



वृष लग्न हो तथा नवमेश दशमेश का संबंध भाग्य भाव में हो, चतुर्थेश-पंचमेश का संबंध चतुर्थ भाव में हो तो जातक लक्ष्याधिपति होता है। शनि व मंगल 7 वें भाव में हो तथा उन पर अन्य ग्रहों की दृष्टि न हो तो दत्तक जाने का योग बनता है। वृष लग्न में मंगल यदि वृश्चिक या मकर राशि में हो तो "रूचक योग" बनता है। ऐसा जातक राजा तुल्य ऐश्वर्य को भोगता हुआ अथाह भूमि, संपत्ति व धन का स्वामी होता है। वृष लग्न में सुखेश सूर्य लाभेश गुरु यदि नवम भाव में हो तथा नवम भाव मंगल से दृष्ट हो तो व्यक्ति को अनायास धन प्राप्ति होती है। वृष लग्न में गुरु+ चंद्र की युति मिथुन, सिंह, कन्या या मकर राशि में हो तो इस प्रकार के गजकेसरी योग के कारण व्यक्ति को अनायास उत्तम धन को प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति को लॉटरी, शेयर बाजार या अन्य व्यापारिक स्रोत से अकल्पनीय धन मिलता है। वृष लग्न में धनेश बुध अष्टम में एवं अष्टमेश गुरु धनस्थान में परस्पर परिवर्तन करके बैठे हों तो ऐसा जातक गलत तरीके से धन कमाता है। ऐसा व्यक्ति ताश, जुआ, मटका, घुड़रेस, स्मगलिंग एवं अनैतिक कार्यों से धन अर्जित करता है। शेष भाग -Shribalajiपर देखे ।


Wednesday, October 13, 2021

पापंकुशा एकादशी कथा, अनुष्ठान और महत्व

 



इस वर्ष यह त्यौहार 16 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा । पापंकुशा एकादशी का दिन भगवान पद्मनाभ की पूजा करने के लिए मनाया जाता है जो भगवान विष्णु के अवतार (अवतार) हैं। देवता का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने और इस ब्रह्मांड की कई विलासिता का आनंद लेने के लिए भक्त एक पापंकुशा एकादशी का व्रत रखते हैं। इसे सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है क्योंकि इस व्रत को रखने वाले भक्तों को सांसारिक इच्छाओं, धन और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह माना जाता है कि जब तक वे पापंकुशा एकादशी व्रत का पालन नहीं करते हैं, तब तक व्यक्तियों को पिछले सभी पापों और गलत कार्यों से मुक्त नहीं किया जा सकता है। यह भी माना जाता है कि इस व्रत का फल और लाभ कई अश्वमेध यज्ञों और सूर्य यज्ञों को करने से प्राप्त लाभ के बराबर होता है। शेष भाग -Shribalaji- पर देखे ।

Friday, October 8, 2021

दुर्गा अष्टमी 2021 की तिथि मुहूर्त व पूजा विधि

 


        ऐसा माना जाता है की दुर्गा अष्टमी दुष्ट भैंस राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत का जश्न के उपलक्ष में मनाया जाता है। किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा द्वारा दिए गए एक वरदान के कारण, महिषासुर को केवल एक महिला योद्धा ही पराजित कर सकती थी। जब भगवान इंद्र को युद्ध के मैदान में परास्त किया गया था व पवित्र त्रिमूर्ति, ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी ने दुर्गा की रचना की और उनके शरीर के प्रत्येक भाग को विभिन्न पुरुष देवताओं की ऊर्जाओं की शक्ति प्रदान की। इसी दिन दुर्गा अष्टमी के रोज उन्होंने अपने त्रिशूल से महिषासुर को हराने के लिए अपनी ताकत का प्रतीक हथियारों का इस्तेमाल किया था।

 दुर्गा अष्टमी 2021 की तिथि व विधि

दुर्गा अष्टमी, हिंदू कैलेंडर के पंचांग अनुसार कहा गया है कि इस वर्ष दुर्गा अष्टमी तिथि का समय 13 अक्टूबर, 2021 को दोपहर बाद 20:10 बजे तक रहेगी।

शेष भाग के लिये -Shribalaji- पर क्लिक करे।

संतान बाधा और उपाय

  (संतानहीन योग ) पंचमेश पापपीड़ित होकर छठे, आठवें, बारहवें हो एवं पंचम भाव में राहु हो, तो जातक के संतान नहीं होती। राहु या केतु से जात...